धारा 370 कैसे हटी? 370 आर्टिकल हटाने की पूरी प्लानिंग जानिए |

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धारा 370 कैसे हटी?
©One E-India

धारा 370 हट चुकी है मगर ये कैसे हटी और इस हटाने के पीछे सरकार ने कैसे प्लानिंग की आप जानेंगे आज के इस ब्लॉग में | यह इनफार्मेशन आज की ताज़ा खबर चैनल से ली गयी है | आप ऊपर दिए हुई वीडियो को भी देख सकते है कि धारा 370 कैसे हटी |

धारा 370 कैसे लागू हुई ?

आजादी यानी 1947 का वो वक्त जब सारी रियासते ये सोच रही थी कि हम पाकिस्तान में मिल जाये , आज़ाद रहे या भारत का हिस्सा बन जाये तो कश्मीर की जो रियासत थी उन्होंने भारत में मिलने का मन बना लिया उसके बाद वाकी जो बची रियासत थी जिन्होंने भारत में मिलने का मन बना लिया था उन्होंने अपने अपने हस्ताक्षर कर दिए और पूर्ण विलय के लिए अपनी मंजूरी दे दी | वहीं जम्मू और कश्मीर में ये पूर्ण विलय की बात अटक गयी थी |जम्मू कश्मीर पूर्ण विलय के लिए शायद तैयार नहीं था | तो भारत की सरकार इसके लिए जम्मू कश्मीर की authorities को मन के लिए लगी हुई थी |

अब साल दर साल बीतते गए और 1951 आता है | 1951 में एक समिति का निर्माण होता है जिसका नाम रखा जाता है constituent assembly | यह समिति एक ड्राफ्ट तैयार करती है उस ड्राफ्ट में बताया जाता है कि जम्मू कश्मीर को भारत के साथ कैसे साथ साथ गवर्न करा जाता है और उसको धीरे धीरे भारत में पूर्ण विलय किया जा सकता है |

धारा 370 का सुझाव 

यह समिति धारा 370 का सुझाव देती है | और उस आर्टिकल 370 का जो नाम रखा जाता है वो रखा जाता है “temporary provisions with respect to the state of Jammu and kashmir” | यानी जब इस समिति ने इसे बनाया था तभी इसे टेम्पररी बताया गया था ताकि इसे बाद में हटाया जा सके | और अगर आप आज भी इसका टाइटल देखेंगे तो अभी भी यह temporary provision है |

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लेकिन जैसा कि आप जानते है कि 70 साल बीत गए और इसे हटाया नहीं जा सका | constituent assembly ने साफ़ तौर पर कहा था कि इसे constituent assembly की मंजूरी के साथ हटा दिया जायेगा जब हालात ठीक हो जायेंगे |

अम्बेडकर जी ने किया 370 का विरोध

जब इस आर्टिकल का सुझाव दिया गया था तब उस वक्त के कानून मंत्री डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने इसका पुरजोर विरोध किया था | उन्होंने कहा था कि ये जो आर्टिकल है यह भारत विरोधी है | लेकिन नेहरु और कांग्रेस के एनी लोगो की वजह से इसे पारित कर दिया गया |

आर्टिकल 370 कैसे हट सकता है ?

साल 2018 में विजय लक्ष्मी जी नाम की एक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में रिट दायर की | उन्होंने पुछा कि आर्टिकल 370 को कैसे हटाया जा सकता है ? इसके खिलाफ उन्होंने केस किया | सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर दिया कि “इसे सिर्फ constituent assembly की मंजूरी से हटाया जा सकता है | लेकिन अब constituent assembly है ही नहीं तो मंजूरी कौन देगा ? इसीलिए अब इसे हटाया नहीं जा सकता |”

दरसल 1957 में constituent assembly नहीं रही | इसलिए अब आर्टिकल 370 नहीं हट सकती थी |

धारा 370 कैसे हटी?

2015 जम्मू कश्मीर के चुनाव थे | चुनाव का नतीज़ा आया जिसमे Hung assembly आयी जिसमे पता चला कि पीडीपी और बीजेपी ने सरकार बना ली |

यह सरकार बनाना इसलिए जरुरी था ताकि बीजेपी पीडीपी के कुछ MLA’s को बीजेपी अपनी तरफ कर सके | एक ऐसा गठबंधन जो कभी हो नहीं सकता था वो हो गया था | और यही था पहला स्टेप आर्टिकल 370 को हटाने के लिए |बीजेपी ने पीडीपी के कुछ नेता कर लिए थे अपनी तरफ सज्जाद लोन जो कि मोदी-मोदी करते हुए नहीं थक रहे थे |

पीडीपी से समर्थन वापिस 

2018 जून में बीजेपी पीडीपी से अपना समर्थन वापिस ले लेती है और सरकार गिर जाती है | गवर्नर के हाथ में कमान पहुँच जाती है और गवर्नर समय देता है कि “20 नवम्बर तक आपको अपना बहुमत साबित करना होगा | अगर आप फ़ैल होते है तो फिरसे चुनाव होंगे और तब तक गवर्नर शासन रहेगा जम्मू और कश्मीर में |

21 नवम्बर की तारिख बहुत ही महत्वपूर्ण थी | जम्मू कश्मीर में विंटर सेशन और समर सेशन होते है | समर सेशन लगता है श्री नगर में और विंटर सेशन लगता है जम्मू में | और अक्षर इस तरह की डील या गठबंधन होते है वो आखिरी तारीख तक पहुँचते है | और 21 नवम्बर को तब तक श्री नगर से जम्मू पहुँच चुकी थी वहां की विधानसभा | यानी जो गवर्नर था वो अब जम्मू में बैठता था और पूरी पॉलिटिक्स चल रही थी श्री नगर कश्मीर के अन्दर |

बहुमत साबित करने का आखिरी दिन

अब आखिरी दिन आ गया था अपना बहुमत साबित करने का | अब महबूबा मुफ़्ती राज्यपाल को फैक्स भेजती है कि “हमारे पास 56 MLA हो गए है , मैं सरकार बनाने में सक्षम हूँ |” सज्जाद लोन भी जिन्हें बीजेपी का समर्थन प्राप्त था 56 MLA होने का दावा करते है और कहते है कि मैं भी सरकार बना सकता हूँ | लेकिन गुप्त तरीके से राज्यपाल की फैक्स मशीन ख़राब हो जाती है जिससे उनके पास फैक्स नहीं पहुँचते है |

महबूबा मुफ़्ती संपर्क करने की कोशिश करती है उनसे फ़ोन पर लेकिन सारी कोशिश व्यर्थ हो जाती है | सज्जाद लोन दूसरी तरफ से whatsapp करते है राज्यपाल के PA को लेकिन वो इनफार्मेशन भी राज्यपाल तक नहीं पहुँचती है और राज्यपाल 21 तारीख तो घोषित कर देते है कि “सारी पार्टीज फ़ैल हो गयी है | अब जब तक चुनाव नहीं होते तब तक राज्यपाल शाशन रहेगा |” अब कमान आ गयी थी राज्यपाल के हाथ में |

लोकसभा की पॉवर गवर्नर को ट्रान्सफर होना

अब आता है दिसंबर 2018 जो कि लेके आता है राष्ट्रपति द्वारा पारित एक बिल जिसका नाम है आर्टिकल 356 | उस बिल में कुछ संशोधन किये जाते है और उन संशोधन को रखा जाता है सुप्रीम कोर्ट के सामने और सुप्रीम कोर्ट से कहा जाता है कि SC ST है जो जम्मू कश्मीर में उन्हें उनके अधिकार नहीं मिल पा रहे हैं इसी वजह से हम चाहते है कि विधानसभा  की पॉवर अथॉरिटी ऑफ़ पार्लियामेंट को दे दिए जाए क्योंकि उनके पास अभी वो पॉवर नहीं है और जैसे ही उनके पास ये पॉवर आ जायेगी वैसे ही SC ST’s को उनके अधिकार मिलने लगेंगे |

तो सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही देखा कि SC ST’s को उनके अधिकार नहीं मिल पा रहे है और अगर वो यह बिल पारित नहीं करेंगे तो उनके SC ST विरोधी छवि हो सकती है इसिलए वो यह बिल पारित कर देते है | अब सारी ताकत थी राज्यपाल के पास|

आखिरी कदम 

अब 5 अगस्त 2019 के दिन के दिन एक और संशोधन किया गया | यह संशोधन किया गया आर्टिकल 367 में| और इस संशोधन में लिखा जाता है कि  constituent assembly के पास जो पॉवर थी वो अब विधानसभा के पास है |

विधानसभा यानी वो जो सरकार चला रही है | और सरकार गवर्नर चला रहा है | अब आर्टिकल 370 हट सकता है | अब 367 की वजह से सारी ताकत गवर्नर के पास आ गयी यानी एक तरीके से गवर्नर को constituent assembly का दर्जा दे दिया गया | अब 370 को पॉवर लेस करना आसान था |

अब राष्ट्रपति द्वारा एक गजट पेश किया जाता है जिसमे सहमती थी गवर्नर की या कह दे constituent assembly की और इसके बाद 370 को पॉवर लेस कर दिया गया |

इस तरीके से सरकार ने धारा 370 हटाई |

फारुख अब्दुल्लाह ने भी कहा था कि 100 साल बाद जब मोदी को कोई याद करने वाला कोई नहीं होगा तब भी यह धारा नहीं हटेगी लेकिन मोदी जी ने यह कर दिखाया | और सरकार के इस कदम की हम सराहना करते है |

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